आ गए मेरी वेबिनर का तमाशा देखने

टिप्पणी

आ गए मेरी वेबिनर का तमाशा देखने

अब मेरे बारे मे बोलेंगे , माइक सामने आएगा , आंखे कैमरा के सामने आएगा, थोरी देर एम आई औडिबल बोलता रहूँगा, फिर ये मेरा भाई मुझे थैंक यू बोलेगा | फिर आप लोग नाइस सर नाइस सर बोलके कैमरा ऑफ करके खाना खाके सो जाओगे

तुम्हारी ये नासमझी , बुज़दिली , एक दिन इस लाइब्ररी की मौत का तमाशा एसी खामोशी से देखेगी कुछ नहीं कहना मुझे तुम्हें कुछ नहीं

तुम्हारी जिंदगी मे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला अंधेरे मे रहने की आदत पड़ी है तुमको

चापलूसी करने की आदत पड़ी है , पहले राजा महाराजा की गुलामी की फिर अंग्रेज़ो की अब चंद पोसिशन वालों की और डिग्री वालों की

नौकरी के नाम पे ये तुमको बहकाते है तुम एक दूसरे के टांग खीच रहे हो , खीचो खिचो

उपर से रंगनाथन जी देखते होंगे तो शरम आती होगी , सोचते होंगे मैंने सबसे खूबसूरत चीज बनाई थी , लाइब्ररी| नीचे देखा तो सब गोदाम बन गए गोदाम |

वेबिनर करते रहे करते रहो भाषण सुनते रहो और फसों, सुने और गए खेल खत्म

क्यो वेबिनर किए मालूम नहीं क्यू वेबिनर मे भाग लिए मालूम नहीं

रंगनाथन जी क्रांति लाना चाहते थे फाइव लॉं के ज़ोर पर स्थिति को सुधारणा चाहते थे , कौन समझा उनकी बात को सब गूंगे बहरे मतलबी किसे जगाते वो , मैं जाग गया कुछ अच्छा काम करके जा रहा हु सकुन है |

लेकिन ध्यान रखना तुम्हारी ये खामोसी और चापलूसी तुम्हारे बच्चो के लिए रोना बन जाएगी

ये पोसिशन वाले डिग्री वाले लोग अपना फर्ज़ नहीं निभाया , एक दूसरे का टांग खीचते वक़्त ये तुम्हारा ईमान कहा गया था भांड मे ?

अपना खुद का लाइब्ररी और डिपार्टमेंट तो ठीक नहीं बना पा रहे है और दूसरों को सपना दिखा रहे है ,हमे नौकरी दिलाने की बात कर रहे है और खुद आगे बढ्ने के लिए जुगाड़ पे जुगाड़ लगाए जा रहे है

ये डाइरेक्टर , लाइब्रेरियान , प्रोफेसर फलाना ढिमकाना अरे जब लाइब्ररी साइन्स पढ़ाया गया था तो सबका फर्ज़ एक था सम्पूर्ण लाइब्रेरी का विकाश , हम भले पोसिशन मे छोटे बड़े है पर हम सबका मकसद एक है पुस्तकलाय और पुस्तकालय विषय का विकाश !

मेरा मकसद किसी कि भावनाओ को ठेश पाहुचना नहीं किन्तु कुछ हकीकत को सामने लाना और लोगो को जगाना है !

नानपाटेकर कि फिल्म क्रांतिवीर से प्रेरित !

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